Diabetes

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क्यों चुने Homeopathy मधुमेह (Diabetes) में ?

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मधुमेह :

Diabetes | चयापचय संबंधी बीमारियों का एक समूह है जिसमे लंबे समय तक रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ी रहती है। बढ़ी हुई इस शुगर की मात्रा के कारण प्यास में बढ़ोतरी, पेशाब में शुगर का आना व भूख का बढ़ना जैसे कई लक्षण दिखाई देते हैं ।

उचित उपचार न मिलने पर ये कई सारी नई बीमारियों को जन्म दे सकता है जो जानलेवा साबित हो सकती है ।

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होम्योपैथी के अनुसार मधुमेह एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों में से एक है, जिन्हे chronic disease कहा जाता है । कोई भी पैथी इसका पूर्ण रूप से सफल इलाज का परिणाम नही देती, आप इसे दवाओं की मदद से नियंत्रित कर सकते है। होम्योपैथी का सिद्धांत है की वह बीमारी से लड़ती है बीमार से नहीं, अतः होम्योपैथी का उद्देश्य इंसान को पूर्ण रूप से स्वस्थ करना है चाहे बीमारी कोई भी हो। आप ये जान ले कि होम्योपैथी मधुमेह में कारगर रही है और लक्षण के आधार पर चुनी गयी दवा चमत्कारी परिणाम देने में सफल रही है।

क्या है कारण ? | Reason of diabetes-

  • शरीर में उपस्थित अग्नाशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नही कर पा रहा।
  • इंसुलिन के पर्याप्त उत्पादन के बाद भी कोशिकाएं उसका उपयोग नहीं कर पा रही।

दोनों ही कारणों के आधार पर मधुमेह के चार प्रकार है।

Types of diabetes

1 टाइप 1– इस प्रकार के Diabetes में अग्नाशय द्वारा पर्याप्त इंसुलिन उत्पादन नही हो पाता है, जिसके कारण शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम व शुगर की मात्रा अधिक हो जाती है। इसे किशोर मधुमेह या इंसुलिन आश्रित Diabetes mellitus के नाम से भी जाना जाता था।

2. टाइप 2 – Diabetes के इस प्रकार में शरीर में कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन के लिए प्रतिरोध देखा जाता है जिसके कारण इंसुलिन का उपयोग सही रूप से नही हो पाता। इसे व्यस्क Diabetes या गैर- इंसुलिन आश्रित मधुमेह मेलाइटिस् भी कहा जाता था।

3. गर्भावधि मधुमेह– ये प्रकार गर्भवती महिलाओ में पाया जाता है। ऐसी महिलाओ में भविष्य में टाइप २ Diabetes होने का खतरा बढ़ जाता है। जरुरी है कि इससे बचाव के लिए महिलाएं संतुलित आहार व व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

4. सेकेंडरी डाइबिटिस्– यह अन्य कारण जैसे अग्नाशय का कैंसर या अग्नाशय में सूजन जैसे कारणों से होती है ,यह सिर्फ इलाज़ मात्र से ही ठीक हो सकती है।

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जानिए क्या हैं लक्षण | Symptoms of diabetes

  • बहुत ज्यादा प्यास लगना
  • बार बार पेशाब आना
  • अत्यधिक भूख लगना
  • धुंधला दिखना
  • वजन कम होना
  • सिरदर्द
  • त्वचा रोग
  • छाले होना

कौन से टेस्ट है ज़रूरी | Tests for diabetes

मधुमेह में आपके रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जिसका पता आप कुछ ज़रूरी टेस्ट के माध्यम से कर सकते हैं।

फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज़- इसमे मरीज़ को 8 घण्टे भूखे रहने की सलाह दी जाती है और उसके बाद टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट का परिणाम यदि 99 se अधिक आता है तो इसका तात्पर्य है की आपके शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ी हुई है।

HbA1C- इसमे ऐसी हीमोग्लॉबिंन कोशिकाओं की मात्रा पता की जाती है जो शुगर से जुड़ी होती हैं, इनकी संख्या में बढ़ोतरी होने का तात्पर्य है शुगर में बढ़ोतरी होना।

रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज़- ये टेस्ट किसी भी समय किया जा सकता है जिसमे प्लाज्मा में ग्लूकोज़ की मात्रा मापी जाती है। ग्लूकोज़ की मात्रा 200 से अधिक आने का तात्पर्य है कि आप मधुमेह के शिकार हो सकते हैं।

क्या खाएँ मधुमेह में

ये एक ऐसी बीमारी है जहाँ इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि आप अपने भोजन में क्या क्या सम्मिलित करे.

हरी सब्जियाँ व फल आप प्रतिदिन लें ये आपकी सेहत के लिए बहुत लाभदायक साबित होंगी मधुमेह के मरीज़ को हर संभव प्रयास करना चाहिए कि वह ऐसी चीजों से दूर रहे जो रक्त में Sugar की मात्रा बढ़ा दे.

उदाहरण के तौर पर- चॉकलेट, मिठाइयां, केक, पेस्ट्री, ड्राई फ्रूट.

आप चाहे तो क्रत्रिम रूप से बनाई गई शकर का इस्तेमाल अपने खाने व चाय , कॉफ़ी में कर सकते हैं।

ड्राई फ्रूट की बात करें तो आप बादाम का सेवन कर सकते है जिसमे शुगर कम होती है एवं ये ज़रूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है।

कुछ सब्जियां ऐसी भी है जिन्हे खाने से आपको बचना है जैसे- आलू , शकरकंद, अरबी, शलजम

इन सब्जियों के अलावा आप सारी सब्जियों का सेवन कर सकते हैं।

इसी प्रकार कुछ फल भी जो आपको Diabetes मे नही खाना चाहिए जिनमे शुगर काफी अधिक मात्रा मे उपस्थित होती है जैसे- आम, केला, अंजीर, सीताफल, चेरी आदि.

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इसके अलावा आप फलों में जामुन सेव अमरूद नाशपाती का सेवन कर सकते है। विशेष रूप से जामुन Diabetes में लाभदायक है। भोजन में से शुगर की मात्रा कम कर के ही आप मधुमेह को नियंत्रित रख सकते है तो खानपान का विशेष ध्यान रखे व समय से भोजन लेते रहे।

होम्योपैथिक उपचार | Homeopathy treatment of diabetes

ऐसे कई केस देखे गए है जहाँ होम्योपैथी से मधुमेह को नियंत्रित किया गया है और ये संभव भी है, लक्षण के आधार पर सही तरीके से चुनी गई दवा बखूबी काम करती है।

कुछ दवाएं जो अधिकतर मधुमेह में इस्तेमाल की जाती है-

Syzygium jambolinum- इस दवा का इस्तेमाल विशेष रूप से पेशाब में शुगर आने व छाले होने पर किया जाता है।

Uranium nitricum- बार बार पेशाब आना, शरीरिक कमजोरी, कब्ज़ , मर्दो में नपुंसकता जैसे लक्षणों के लिए कारगर दवा है।

Phosphoric acid- बार बार पेशाब आना, जलन होना, कमजोरी होना आदि लक्षण इस से ठीक किये जा सकते है।

Gymnema sylvestre- जब मरीज़ को ज्यादा मात्रा में पेशाब आने के कारण कमजोरी पैदा हो एवं बार बार प्यास लगे तब इस दवा का उपयोग किया जा सकता है।

Cephalandra indica- अधिक प्यास लगना, त्वचा रोग, मुह सुखना जैसी समस्या मे ये दवा सोची जा सकती है।

कैसे बचें मधुमेह से

  • अपनी दिनचर्या में व्यायाम शामिल अवश्य करें
  • मोटापा बढ़ने से रोके, ये और भी कई बीमारियों को जन्म देता है।
  • नियमित रूप से शुगर की जाँच कराते रहे।
  • गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। हर संभव प्रयास करें की जरूरत से ज्यादा वजन न बढ़े।

आपकी सेहत आपके ही हाथों में है, सही चुने सही जिएँ।

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Dr. Shivani Soni BHMS

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