Rahat indori

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“बुलाती है मगर जाने का नहीं” मशहूर शायर राहत इन्दोरी का कोरोना से निधन-

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Indore | Rahat indori | जितने अपने थे सब पराए थे, हम हवा को गले लगाए थे।

इधर भारत आज़ादी के बाद, अपनी स्वाधीनता का स्वाद चखने जा रहा और और ठीक उसी वक़्त – १ जनवरी १९५० को इंदौर में एक कलम के आज़ाद शायर दुनिया में अपने कदम रख चुके थे।

Rahat indori साहब का आधा जीवन इंदौर में पढ़ते गुज़रा और आधा लोगों को अपना सुनाते वो भी सिर्फ़ देश में नहीं विदेशों में भी।

वैसे तो एक मुस्लिम परिवार में जन्मे Rahat indori साहब के अब्बू बहुत अमीर नहीं थे और एक कपड़े की मिल में काम किया करते थे ,और राहत उनकी ४ संतान थे मगर फिर भी राहत साहब ने उर्दू भाषा में पीएचडी की.. और उर्दू को लोगों के दिलों में बसा दिया और साथ में रह गए सबके अंदर।

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Rahat indori साहब रंग से थोड़े से सांवले थे तो अक्सर कहा करते थे कि – दिलों में आग ,लबों पे गुलाब रखते हैं। सब अपने चेहरों पे दोहरे नक़ाब रखते हैं।

लेखनी से बिल्कुल सफ़ेद थे वो, वक़्त की शाख से उन्होंने कुछ ४०-४५ साल से भी ज्यादा की जिंदगी अपनी नज्मों,शायरी, ग़ज़लों को दे दी।

कहते हैं Rahat indori साहब के इन्दौर की पैदाईश होने की वजह से राहत इंदौरी कहा जाने लगा था , मगर राहत जी सिर्फ़ इंदौरी नहीं सच्चे हिंदुस्तानी थे और वो कहते थे की – मैं मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना, ख़ून से मेरी पेशानी पर हिन्दुस्तान लिख देना।

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शायर मिजाज़ Rahat indori साहब ने वैसे तो सब कुछ लिखा है ,देश के बारे में ,आज़ादी के बारे में ,मगर इश्क़ से उनका राब्ता गहरा और सबसे ज्यादा उन्होंने मोहब्बत पे ही लिखा। उनकी निजी जिंदगी में भी मोहब्बत ने दो बार दस्तक दी थी उनकी पहली पत्नी – अंजुम रेहबर और दूसरी पत्नी – सीमा राहत।

इनके बेटे फैसल भी शायरी की दुनिया में वैसे तो कदम रख चुके हैं…मगर जो स्वाद लोगों को राहत साहब की आवाज़ सुनके आता है वो शायद ही कहीं और मिले।

आज सुबह ही Rahat indori साहब अपने Corona positive होने की जानकारी Tweet करके दी थी –

Rahat indori साहब कोविड से पॉजिटिव पाए गए और आज दिल के दौरे के कारण उन्होंने दुनिया से विदा ले लिया।

उर्दू और हिंदी दोनों ही भाषाओं को ग़ज़लों में उतारने वाले Rahat indori साहब ने वैसे तो कई किताबें लिखीं जैसे – धुप- धूप, नाराज़ , मेरे बाद ,चाँद पागल है मगर फिलहाल में उनकी एक ग़ज़ल ने लोगों को हाल फ़िलहाल में फिर से को उनका दीवाना बना दिया –

बुलाती है मगर जाने का नई, ये दुनिया है इधर जाने का नई।

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर, मगर हद से गुज़र जाने का नई।।

Rahat indori

ख़ैर Rahat indori जी का सफ़र बस मुशायरों या कवि सम्मेलनों तक सीमित नहीं रहा – उन्होंने भारतीय सिनेमा जगत के लिए भी कई खूबसूरत गाने लिखे जैसे – धुँआ धूँआ।

राहत साहब के इस लेखन प्रेम को लोगों ने बहुत प्यार दिया और कई तरह के पुरूस्कारों से उनको नवाज़ा जैसे – भारतीय दूतावास सम्मान – रियाद , सऊदी अरब।

उन्होंने पहले ही कह दिया था ना शायद-

वह जो दो गज़ जमीं थे मेरे नाम , आसमां की तरफ़ उछाल आया।

Rahat Indori

आप हमेशा हम में ज़िंदा रहेंगे ठीक अपनी उस नज़्म की तरह – काम सब गैर ज़रूरी हैं जो सब करते हैं , और हम कुछ नहीं करते हैं ग़ज़ब करते हैं.

आप सचमुच अपनी लेखनी से क्या ग़ज़ब कर गए।।

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©Ananya (ZIYA)

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